{ पुरानी कहानियाँ }

बेताल पच्चीसी की कहानियाँ
बेताल पच्चीसी 00
बेताल पच्चीसी 01
बेताल पच्चीसी 02
बेताल पच्चीसी 03
बेताल पच्चीसी 04
बेताल पच्चीसी 05
बेताल पच्चीसी 06
बेताल पच्चीसी 07
बेताल पच्चीसी 08
बेताल पच्चीसी 09
बेताल पच्चीसी 10
बेताल पच्चीसी 11
बेताल पच्चीसी 12
बेताल पच्चीसी 13
बेताल पच्चीसी 14
बेताल पच्चीसी 15
बेताल पच्चीसी 16
बेताल पच्चीसी 17
बेताल पच्चीसी 18
बेताल पच्चीसी 19
बेताल पच्चीसी 20
बेताल पच्चीसी 21
बेताल पच्चीसी 22
बेताल पच्चीसी 23
बेताल पच्चीसी 24
बेताल पच्चीसी 25

106 responses to “{ पुरानी कहानियाँ }

  1. पिंगबैक: बेताल पच्चीसी – तेरहवीं कहानी « यह भी खूब रही।

  2. पिंगबैक: बेताल पच्चीसी – चौदहवीं कहानी « यह भी खूब रही।

  3. पिंगबैक: बेताल पच्चीसी – सत्रहवीं कहानी « यह भी खूब रही

  4. पिंगबैक: वफादार खजांची « यह भी खूब रही

  5. पिंगबैक: ईश्वर का स्थान « यह भी खूब रही

  6. पिंगबैक: नियम वो जिससे भगवान प्रसन्न हों « यह भी खूब रही

  7. पिंगबैक: भक्त और भगवान « यह भी खूब रही

  8. पिंगबैक: धनतेरस की कहानी « यह भी खूब रही

  9. पिंगबैक: जीवन का रहस्य « यह भी खूब रही

  10. पिंगबैक: दो घड़ी धर्म की « यह भी खूब रही

  11. पिंगबैक: कड़वा सच « यह भी खूब रही

  12. पिंगबैक: विश्वास की दौलत « यह भी खूब रही

  13. पिंगबैक: रचना का सम्मान « यह भी खूब रही

  14. पिंगबैक: मेहनत की कमाई « यह भी खूब रही

  15. पिंगबैक: बुद्ध का संदेश « यह भी खूब रही

  16. पिंगबैक: वह खास मुसाफिर « यह भी खूब रही

  17. पिंगबैक: परोपकार का रास्ता | यह भी खूब रही

  18. पिंगबैक: संपूर्ण सुंदरता | यह भी खूब रही

  19. पिंगबैक: महारानी का हार | यह भी खूब रही

  20. I want to read the tales of “Singhasan Battisi”. Please provide if u have.
    Thanks!

  21. पिंगबैक: कर्म और धर्म | यह भी खूब रही

  22. mere email par singhasan bateesee kahani bhejen.

  23. महोदय,आपके websites में मौजूद कथाओं के द्वारा हम अपने छात्रों के शैक्षिक,सामाजिक,सांस्कृतिक,राष्ट्रीय एवं नैतिक मूल्यों के विकास हेतु आपकी उपदेश प्रेरक कथाएं व उनके संदर्भों का उपयोग अपने Hindi Reading Cards में करने के इच्छुक हैं । हम यह कार्य किसी प्रचार माध्यम या आर्थिक लाभ के लिए नहीं करना चाहते हैं अपितु शिक्षा हेतु करना चाहते हैं । मूल सूत्र कथा को छुए बगैर आंशिक रूप से छात्रों के स्तरानुसार इनमें परिवर्तन करेंगे ।
    बेसब्री से आपके लिखित अनुमोदन हेतु
    आपके निवेदक(पद्मजा,सुषमा,सरसवाणी- प्राथमिक शिक्षिकाएँ)
    केंद्रीय विद्यालय २- गोलकोंडा ( हैदराबाद)

  24. महोदय,आपके websites में मौजूद कथाओं के द्वारा हम अपने छात्रों के शैक्षिक,सामाजिक,सांस्कृतिक,राष्ट्रीय एवं नैतिक मूल्यों के विकास हेतु आपकी उपदेश प्रेरक कथाएं व उनके संदर्भों का उपयोग अपने Hindi Reading Cards में करने के इच्छुक हैं । हम यह कार्य किसी प्रचार माध्यम या आर्थिक लाभ के लिए नहीं करना चाहते हैं अपितु शिक्षा हेतु करना चाहते हैं । मूल सूत्र कथा को छुए बगैर आंशिक रूप से छात्रों के स्तरानुसार इनमें परिवर्तन करेंगे ।
    बेसब्री से आपके लिखित अनुमोदन हेतु
    आपके निवेदक(पद्मजा,सुषमा,सरसवाणी- प्राथमिक शिक्षिकाएँ)
    केंद्रीय विद्यालय २- गोलकोंडा ( हैदराबाद)
    Email address: paddya65@gmail.com

  25. पिंगबैक: सदाचरण से सम्मान | यह भी खूब रही

  26. मुझे यह कहानी बहुत अचछी लगी और लाभदायक भी है

  27. i read all these stories .very amazing, interesting and knowledgeable. thanks for Indian literature development efforts

  28. its a wonderful initiative to introduce the new generation with our traditional stories , thanks to you .

  29. sir i want sihasan battisi all storys please upload

  30. shriman jee apke is website se jaha gyanvardhak kahaniya hendi me prkasit hai use padkar ham bahut kuch sike hai

  31. aaj ke bacchho ko ramayan/mahabharat aur poradic Hindu darshan ki kahaniyo ka gyan dekar aap ne sadhuvad k yogya kaam kiya hai.aap ka yash ho!!!!

  32. Thanks a lot for uploading all these lovely stories….

  33. Mere ko ise padhne ke bad jo maza aya wo mai aap ko bata nahi sakta isme hamare jiven ki unik bato ka varnan kiya gaya hai.

  34. thanx sir.ye story padne ke bad koi aur story padne ka man hi nhi kar raha he. wakayi me ye kahaniya itni rochak thi ki maja a gaya padne me.

  35. आपकी काहानि से हम खूश है!!

  36. very intresting Story.
    मैं यहॉं से कहानी पढ् कर अपने बेटे को सुनाती हॅू, मेरा बेटा भी बहुत रूचि से सुनता है

  37. Bhai sahab ydi aap apni khaniyo m nirogi jivn kese yapn kre or pravarn ke batae to aap khanikar hi nhi blki bhart ma ke khule badn ko dhkane ka kary krke logo ak nai chetna la skte ho.[sanchore]

  38. es email pr khaniya bhejne ka kast kre
    mohan soni
    vidisha.
    email=frienddayship@gmail.com

  39. कहानियाँ सुनने के लिए काल करें, 09546937566 या मिस काल दें, कहानियों का राजा हुं मैं, या अपने राशिफल जानने के लिए , देर ना करें , 09973039076

  40. हमलोगों को बहुत अच्छा लगा।

    PRINCE,अतुल,सजीत।

  41. Achha laga mujhe aapki mehnat ka phal ki apne itni mehanat kar ke yah kahaniya prastut ki

  42. mai bhi bahut shree krishn ji bhakt hu mujhe shree krishn ji ki baate bahut acchi lagti hai

  43. Mujhe Is Site Ki Kahaniya Bahut Achhi Lagi So Thanks,,,

  44. I feel a devinity from your blog that never feels before..
    It seems I submerged in a river of knowledge.
    Thanxxx.
    Jai mata

  45. Mujhe ye sab purani kahani bahut accha lagta hai

  46. mujhe ye kahani bahut pasand ayi.
    iss baar alif laila ki kahani likhen.

  47. मझे असी कहानीया बहुत आछी लगती है आप की कहानीया पढ़ कर आछा लगा (धनयवाद)

  48. Name – Shiv Naresh Sahani
    Adress – Baraini,Kachhawa-Mirzapur
    M.b – 7398909950

  49. महोदय सर,
    क्रुपया आप मुझे ‘सिंदबाद की समुद्री यात्रायें’ की कहानियाँ मेरी Email ID पर भेजें।
    धन्यवाद।

  50. sir, kripya kr mujhe bhooton ki kuch kahani mere id m mail kr de

  51. डॉक्टर की पहचान
    रसायनशास्त्री नागार्जुन एक राज्य के राज वैद्य थे। एक दिन उन्होंने राजा से कहा, ‘मुझे एक सहायक की जरूरत है।’ राजा ने उनके पास दो कुशल युवकों को भेजा और कहा कि उनमें से जो ज्यादा योग्य लगे उसे रख लें। नागार्जुन ने दोनों की कई तरह से परीक्षा ली पर दोनों की योग्यता एक जैसी थी। नागार्जुन दुविधा में पड़ गए कि आखिर किसे रखें।

    अंत में उन्होंने दोनों युवकों को एक पदार्थ दिया और कहा, ‘इसे पहचान कर कोई भी एक रसायन अपनी इच्छानुसार बनाकर ले आओ। हां, तुम दोनों सीधे न जाकर राजमार्ग के रास्ते से जाना।’ दोनों राजमार्ग से होकर अपने-अपने घर चले गए। दूसरे दिन दोनों युवक आए। उनमें से एक युवक रसायन बना कर लाया था जबकि दूसरा खाली हाथ आया था।

    आचार्य ने रसायन की जांच की। उसे बनाने वाले युवक से उसके गुण-दोष पूछे। रसायन में कोई कमी नहीं थी। आचार्य ने दूसरे युवक से पूछा, ‘तुम रसायन क्यों नहीं लाए?’ उस युवक ने कहा, ‘मैं पहचान तो गया था मगर उसका कोई रसायन मैं तैयार नहीं कर सका। जब मैं राजमार्ग से जा रहा था तो देखा कि एक पेड़ के नीचे एक बीमार और अशक्त आदमी दर्द से तड़प रहा है। मैं उसे अपने घर ले आया और उसी की सेवा में इतना उलझ गया कि रसायन तैयार करने का समय ही नहीं मिला।’

    नागार्जुन ने उसे अपना सहायक रख लिया। दूसरे दिन राजा ने नागार्जुन से पूछा, ‘आचार्य। जिसने रसायन नहीं बनाया उसे ही आपने रख लिया। ऐसा क्यों?’ नागार्जुन ने कहा, ‘महाराज दोनों एक रास्ते से गए थे। एक ने बीमार को देखा और दूसरे ने उसे अनदेखा कर दिया। रसायन बनाना कोई जटिल नहीं था। मुझे तो यह जानना था कि दोनों में कौन मानव सेवा करने में समर्थ है। बीमार व्यक्ति चिकित्सक की दवा से ज्यादा उसके स्नेह और सेवा भावना से ठीक होता है, इसलिए मेरे काम का व्यक्ति वही है जिसे मैंने चुना है।’

  52. बहुत अच्छा लगा

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s