कीमती वस्तु

एक राजा समय-समय पर प्रतियोगिताएं आयोजित करवाता और विजेता को सम्मान सहित पारितोषिक भी देता। प्रजा इससे उत्साहित रहती थी। एक बार उसने राजपुरुष के चयन की प्रतियोगिता रखी। उसने एक वाटिका बनवाई जिसमें हर तरह की वस्तुएं रखी गईं। लेकिन उन पर उनका मूल्य नहीं लिखा था।

राजा ने ऐलान किया कि जो व्यक्ति इनमें से सबसे कीमती वस्तु लेकर वाटिका से बाहर आएगा, उसे इस वर्ष का राजपुरुष घोषित किया जाएगा। लोग वाटिका में जाते और अपनी समझ से सबसे मूल्यवान वस्तु उठा लाते। कोई हीरे-जवाहरात लाया तो कोई पुस्तक उठाकर लाया क्योंकि उसके लिए ज्ञान अधिक मूल्यवान था। एक गरीब रोटी उठाकर लाया क्योंकि उसकी नजर में रोटी ही मूल्यवान थी। एक भक्त ईश्वर की मूर्ति उठाकर लाया।

तभी एक योगी आया। वाटिका में काफी देर घूमने के बाद वह खाली हाथ बाहर निकला। राजा ने सभी व्यक्तियों द्वारा लाई गई वस्तुओं को देखा। जब योगी की बारी आई तो राजा ने पूछा, ‘तुम क्या लाए हो?’ उसने कहा, ‘मैं संतोष लाया हूं, महाराज।’ राजा ने पूछा, ‘तुम्हारा संतोष क्या सबसे मूल्यवान है?’

योगी ने जवाब दिया ‘हां, महाराज। इस वाटिका में आपने जितनी भी वस्तुएं रखी हैं, उन्हें प्राप्त कर मनुष्य को खुशी तो होगी पर वह क्षणिक होगी। इसे हासिल कर लेने के बाद फिर कुछ और पाने के लिए मन बेचैन हो उठेगा। लेकिन जिसके पास सच्चा संतोष है वह सभी इच्छाओं से ऊपर होगा और सुखी रहेगा।’ योगी को राजपुरुष घोषित किया गया।

संकलन : ललित गर्ग
नवभारत टाइम्स में प्रकाशित

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9 responses to “कीमती वस्तु

  1. sukh ke liye santosh hi hai sabse bada dhan.

  2. ऐसे महाराजे हमारे टाइम में क्यों नहीं होते?

  3. good job appreciated

  4. pranam hai aap ko santosh se bada koi nahi lekin santosh ka gyan ishwar ki kripa ke bina nahi milta ishwar hamesha kripa kare sabhi per namaskar

  5. jai ram krishna hari jai shiv shakti jai sitaram jai laxmi narayan om jai jagdish harey jai mata di

  6. इनअल्लाह माअस्साबरीन ॥ बेशक अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है ।