दो घड़ी धर्म की

एक नगर में एक धनवान सेठ रहता था। अपने व्यापार के सिलसिले में उसका बाहर आना-जाना लगा रहता था। एक बार वह परदेस से लौट रहा था। साथ में धन था, इसलिए तीन-चार पहरेदार भी साथ ले लिए। लेकिन जब वह अपने नगर के नजदीक पहुंचा, तो सोचा कि अब क्या डर। इन पहरेदारों को यदि घर ले जाऊंगा तो भोजन कराना पड़ेगा। अच्छा होगा, यहीं से विदा कर दूं। उसने पहरेदारों को वापस भेज दिया।

दुर्भाग्य देखिए कि वह कुछ ही कदम आगे बढ़ा कि अचानक डाकुओं ने उसे घेर लिया। डाकुओं को देखकर सेठ का कलेजा हाथ में आ गया। सोचने लगा, ऐसा अंदेशा होता तो पहरेदारों को क्यों छोड़ता? आज तो बिना मौत मरना पड़ेगा। डाकू सेठ से उसका माल-असबाब छीनने लगे। तभी उन डाकुओं में से दो को सेठ ने पहचान लिया। वे दोनों कभी सेठ की दुकान पर काम कर चुके थे। उनका नाम लेकर सेठ बोला, अरे! तुम फलां-फलां हो क्या? अपना नाम सुन कर उन दोनों ने भी सेठ को ध्यानपूर्वक देखा। उन्होंने भी सेठ को पहचान लिया। उन्हें लगा, इनके यहां पहले नौकरी की थी, इनका नमक खाया है। इनको लूटना ठीक नहीं है।

उन्होंने अपने बाकी साथियों से कहा, भाई इन्हें मत लूटो, ये हमारे पुराने सेठ जी हैं। यह सुनकर डाकुओं ने सेठ को लूटना बंद कर दिया। दोनों डाकुओं ने कहा, सेठ जी, अब आप आराम से घर जाइए, आप पर कोई हाथ नहीं डालेगा। सेठ सुरक्षित घर पहुंच गया। लेकिन मन ही मन सोचने लगा, दो लोगों की पहचान से साठ डाकुओं का खतरा टल गया। धन भी बच गया, जान भी बच गई। इस रात और दिन में भी साठ घड़ी होती हैं, अगर दो घड़ी भी अच्छे काम किए जाएं, तो अठावन घड़ियों का दुष्प्रभाव दूर हो सकता है। इसलिए अठावन घड़ी कर्म की और दो घड़ी धर्म की। इस कहावत को ध्यान में रखते हुए अब मैं हर रोज दो घड़ी भले का काम अवश्य करूंगा।

प्रस्तुति : ज्ञानचंद जैन
नवभारत टाइम्स में प्रकाशित

dhanwan seth, daku, athawan ghadi karm ki aur do ghadi dharm ki, धनवान सेठ, डाकू, अठावन घड़ी कर्म की और दो घड़ी धर्म कीम, अठावन घड़ी कर्म की, दो घड़ी धर्म की, नरेश का ब्लौग, पुरानी कहानीयां, पुरानी कहानीयों का ब्लौग, प्रयास, प्रयास का ब्लौग, भारत की कहानियाँ, भारत की पौराणिक कथाएं, यह भी खूब रही, हिन्दी ब्लौग, bharat ki kahaniyan, bharat ki puranik kahaniyan, hindi blog, naresh ka blog, naresh seo, pryas, pryas blog, purani kahani, purani kahaniyon ka blog, puranik kathaein, yah bhi khoob rahi

7 responses to “दो घड़ी धर्म की

  1. अठावन घड़ी कर्म की और दो घड़ी धर्म की।-बहुत उम्दा बोध कथा सुनाई.

  2. iska ulta bhi to ho sakta hai.
    “58 minat dharm or 2 minat karm.”
    idea kaisa hai?

  3. Very good story.

    One does not become wise by having experiences. Only he who learns lessons from experiences, becomes wise. Your sethji seems to be wise. Thank you for sharing this story.

  4. thanks for this comments.
    its great and utilized

  5. kahawat sahi hai 2gadi dharm ka kaam karo lo wo hi sahi hai…