क्या आप मराठी जानते हैं?

शनिवार को गाडी में गैस डलवा रहा था. 10-12 गाडीयाँ मेरे आगे लगी थीं. तभी सडक के पास कुछ लोगों पर नजर पडी. उनमें 3-4 औरतें, कुछ बच्चे और दो युवक थे. दोनों युवक यहाँ-वहाँ कुछ शायद कुछ ढुँढ रहे थे. तभी एक युवक की नजरें मुझसे टकराईं तो वो तुरंत मेरे पास आ गया और बोला, “क्या आप मराठी जानते हैं”. मैंने उत्सुकता में झट से हाँ कह दिया. बस उसने कॉल सेंटर वालों की तरह रटी-रटाई मराठी स्क्रिप्ट सुना दी. मैं बोला यार हिंदी में बोलो क्या बात है. तो उसने वही बात हिंदी में दोहरा दी.

भाई साहब, मैं महाराष्ट्र से काम की तलाश में दिल्ली आया था. यहाँ मेरा भाई ठेकेदारी का काम करता है. पिछले दो महीने से मैं अपने भाई के पास ही काम करता था. लेकिन उसने मुझे पैसे नहीं दिये. इसलिये मैं वापिस गाँव जा रहा हूँ. मेरे साथ मेरी माँ, पत्नि, दो बच्चे और छोट भाई है. हमारे पास जाने के लिये पैसे थोडे कम पड गये हैं. क्या आप दो सौ रूपय की मदद कर सकते हो? हमने कल से खाना भी नहीं खाया.

मैं एक गहरी उलझन में फंस गया था. एक मन कह रहा था कि दे दे यार सौ-दो सौ रूपय में क्या फर्क पडता है और दूसरी तरफ लग रहा था कहीं मुझे ठगने की कोशिश तो नहीं की जा रही. इसी सोच में कुछ मिनिट निकल गये. तभी मेरे पीछे वाली गाडी के हार्न मारने से मेरी सोच टूट गयी. उस लडके की तरफ देखा तो वो गायब था. करीब भागता हुआ मेरे पीछे वाली गाडी के पास खडा होकर गाडी वाले से पूछने लगा, “क्या आप मराठी जानते हैं”…. बस मैं समझ गया कि ये सब ठगने की कोशिश ही है.

उस लडके को शायद मैं पैसे दे देता लेकिन उसके पास इंतजार का समय ही नहीं था. यह कहानी उसकी मजबूरी नहीं ब्लकि ठगी का एक भावनात्मक और सटीक तरीका था. वैसे दिल्ली वालों को ठगना थोडा मुश्किल है लेकिन कोई भी भावनाओं में बह सकता है. कम से कम दो छोटे-छोटे रोते बच्चों को देखकर.

गाडी के टायर बदलवाने थे तो गैस भरवाकर धीरे-धीरे नोएडा की तरफ निकल लिया. गाडी पार्क कर ही रहा था कि तभी एक 28-30 साल का व्यक्ति आया और पूछने लगा, “क्या आप मराठी जानते हैं”. मैंने बोला नहीं और हिंदी में बताओ कि तुम्हारा भाई ठेकेदार है, तुम्हें पैसा नहीं दिया, तुम्हें महाराष्ट्र, यू.पी, बिहार कहाँ जाना है??? इतना सुनने की देर थी वो व्यक्ति बिना एक भी शब्द बोले रफूचक्कर हो गया.

अब समझ नहीं आता कि किस पर विश्वास करें और किस पर नहीं.

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हमारा सुन्दर भविष्य भाईचारे में है, न कि आपसी भेदभाव में
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9 responses to “क्या आप मराठी जानते हैं?

  1. ऐसी ही घटनाओं से हमारी संवेदनाएं मर सी जाती है. आभार.

  2. बिल्कुल सही पकड़ा आपने कुछ ऐसा ही मेरे साथ करोलबाग में, बस उसकी कहानी अलग थी। एक १८-१९ साल का लड़का ने मुझसे कहा कि क्या आपको मराठी आती है मैंने भी कहा कि हाँ आती है, (चूँकि मुंबई में रहते हुए मुझे लगभग ४ साल हो चुके हैं तो कामचलाऊ मराठी तो समझ ही लेते हैं) बोला कि हम लोग नागपुर से आये हैं और हमें पैसे नहीं चाहिये मेरे छोटे भाई को बहुत भूख लगी है जो कि १० साल का है, मैंने उसे, उसके छोटे भाई और उसके साथ की औरत जो शायद उसकी मां हो सकती थी की ओर देखा तो पाया कि तीनों के चेहरों पर भूख लगने की जो बिलबिलाहट होती है वह नहीं है। मैंने उसे समझाया कि देखो ऐसे धोखा देकर खाने से अच्छा है कि मजदूरी कर लो, बात सुनते ही भाग गया और हमारे चारों तरफ़ खड़े लोग उसको भागते देख हंसने लगे। ये केवल दिल्ली में ही नहीं इस तरह से मुंबई में भी दया का पात्र बनने की कोशिश की जाती है।

  3. ye bahut hi galat baat hai,kis pe vishwas kare samjh nahi aata.

  4. ये मांगने का नया तरीका है और इसमे अक्सर बच्चो और महिलाओ को भी उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे लोगो के कारण ही कई बार ज़रूरतमंद को भी उसी नज़र से देखा जाता है और उन्हे तक़्लीफ़ होती है।

  5. हाँ प्रयास जी,
    ऐसा तो एक बार मेरे साथ भी हुआ है, निजामुद्दीन स्टेशन पर.
    मैं उस दिन शाम को सिकंदराबाद से आया था, एक औरत आई. बोली कि बेटा मैं डेरा सच्चा सौदा सिरसा से आई हूँ. और नागपुर जाना है. मेरा पर्स कहीं गुम हो गया है, और मुझे टिकट लेना है. मैंने पूछा कि सिरसा से कौन सी रेल से आई हो? बोली कि सिरसा एक्सप्रेस से. मैंने कहा कि जरा टिकट दिखाना. वो जरा सी सकपका गयी, फिर संभलकर बोली कि टिकट तो टीटी ने ले लिया है.
    कितनी देर पहले?
    अभी जरा सी देर पहले.
    कौन से गेट पर? (दो गेट हैं ना)
    बोली कि बेटा तुम्हे देने हैं या नहीं?
    नहीं.
    फिर वो ऐसी चली गयी कि नहीं दिखी.

  6. AGAR BHAGAMAN TUMHE CHHAPAR PHARKAR KOUCH RUPAY DE TO KAM KYA .KAROGE..SHABASE PAHALE CHHAPAR KA MAMARMAT KARAUGA.

  7. मेरे साथ ऐसी तीन घटनाएं हो चुकी हैं । दो में मैंने मदद कर दी पर तीसरे में नहीं । इनका उल्लेख अपने ब्लॉग http://www.jindageebasyaheehai.wordpress.com की ९ अक्टूबर २००८ तथा ७ मार्च २००९ की पोस्टों में किया है । – योगेन्द्र जोशी

  8. mere sath bhi bhayandar station par hua ek naujwan 25-26 vars ka aya mai tickit lekar dekh raha tha vah naujwan gingine laga aur bola ki mujhe thane jane sivil ka exam dene aur mera koi rikshe me pars mar liya mujhe 200 rupye de do ar apana pata tel.numbar dedo mai vapas de duga mai kaha chalo apana parvesh ptra dikhao mere pas to nahi hai lekin mai yaha station master se kuchh sifaris karata hu to vaha se dusre taraf dekhkar bola nahi thik hai o m,era dost a gaya phir mai train mai baitha to sochane laga ki o thag hi hoga

  9. aaj kal log kisi bhi paise lene ke bahana talaste rahte hai phir isse kisi ko bura lage ya accha.. bus paise mil gay.. aise logo ki vajaha se jarurat mand log nuksan ma rahate hai