स्वतंत्रता का सुख

पुराने जमाने की बात है। एक सम्राट गहरी चिंता में डूबा रहता। कहने को तो वह शासक था पर वह अपने को अशक्त, परतंत्र और पराजित अनुभव करता था। एक दिन वह अपनी चिंताओं से पीछा छुड़ाने के लिए बहुत दूर एक जंगल में निकल पड़ा। उसे वहां बांसुरी के स्वर सुनाई पड़े। एक झरने के पास वृक्षों की छाया तले एक युवा चरवाहा बांसुरी बजा रहा था। उसकी भेड़ें पास में ही विश्राम कर रही थीं। सम्राट ने चरवाहे से कहा, ‘तुम तो ऐसे आनंदित हो जैसे तुम्हें कोई साम्राज्य मिल गया है।’

चरवाहे ने कहा, ‘आप ठीक कहते हैं। मैं सम्राट हूं।’ राजा ने आश्चर्य से पूछा, ‘तुम्हारे पास ऐसा क्या है, जिसके कारण तुम अपने को सम्राट कहते हो?’ चरवाहा मुस्कराया और बोला, ‘व्यक्ति संपत्ति और ताकत के कारण नहीं स्वतंत्रता के कारण सम्राट होता है। मेरे पास तो कुछ भी नहीं है सिवा स्वयं के। मैं इसे ही अपनी संपदा मानता हूं। सौंदर्य को देखने के लिए मेरे पास आंखें हैं। प्रेम करने के लिए मेरे पास हृदय है। सूर्य जितना प्रकाश मुझे देता है उससे ज्यादा सम्राट को नहीं देता।

चंद्रमा जितनी चांदनी मुझ पर बरसाता है उससे ज्यादा सम्राट पर नहीं बरसाता। सुंदर फूल जितने सम्राट के लिए खिलते हैं उतने ही मेरे लिए भी खिलते हैं। सम्राट पेट भर खाता है और तन भर पहनता है। मैं भी वहीं करता हूं। फिर सम्राट के पास ऐसा क्या है जो मेरे पास नहीं है। कई मामलों में तो मेरे पास एक सम्राट से ज्यादा ही कुछ है जैसे मेरी स्वतंत्रता। मैं जब चाहता हूं संगीत का सुख लेता हूं जब चाहता हूं सो जाता हूं, जबकि एक सम्राट चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकता।’

सम्राट हतप्रभ उस चरवाहे को देखता रहा। फिर उसने कहा, ‘प्यारे भाई। तुम एकदम ठीक कहते हो। जाओ अपने गांव में सबसे कह दो कि इस राज्य का सम्राट भी यही कह रहा था।’

संकलन: त्रिलोक चंद जैन
नवभारत टाइम्स में प्रकाशित

8 responses to “स्वतंत्रता का सुख

  1. कई मामलों में तो मेरे पास एक सम्राट से ज्यादा ही कुछ है जैसे मेरी स्वतंत्रता। मैं जब चाहता हूं संगीत का सुख लेता हूं जब चाहता हूं सो जाता हूं, जबकि एक सम्राट चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकता।’
    क्‍या पढने से कोई विद्वान हो सकता है ? ऐसे सोंच की जरूरत होती है विद्वान होने के लिए।

  2. सच बहुत सुन्दर कथा है

    —आपका हार्दिक स्वागत है
    चाँद, बादल और शाम

  3. मेरे पास तो कुछ भी नहीं है सिवा स्वयं के। मैं इसे ही अपनी संपदा मानता हूं। सौंदर्य को देखने के लिए मेरे पास आंखें हैं। प्रेम करने के लिए मेरे पास हृदय है। सूर्य जितना प्रकाश मुझे देता है उससे ज्यादा सम्राट को नहीं देता।
    ” kitna gehra sach chupa hai in pankriyon mey……prerk ktha..”

    Regards

  4. bilkul sahi, charvaha hi asli samrat hai.

  5. Sachha sukh dhan-daulat mein nahi ,swatantrta se jeene mein hai.