राज ठाकरे की बोलती बंद क्यों हो गई

बहुत से गैर मराठी मुंबई में आये, आतंकवादीयों को मारा, बंधकों को छुडाया और हज़ारों लोगों की जान बचाई. राज ठाकरे को इन गैर मराठी मानुसों से कोई समस्या नहीं है. अब उनकी मनन सेना कहाँ गई. हाँ याद आया इस हफ्ते तो उनकी छुट्टी थी क्योंकि इस शुक्रवार को तो कोई फिल्म भी रिलीज़ नहीं हुई जिसके वो पोस्टर फाड सकें.

ये सेना वाले और एनएसजी के कमांडोंज़ तो हिंदी और अंग्रेजी में ही बात कर रहे थे ना. क्यों ठाकरे साहब इनको नहीं सिखाओगे मराठी? और ये ही क्यों, वो आतंकवादी भी तो बाहर से ही आये थे. उन्हें भी भगाते मुंबई से. उनको भी कहते की गोलीयाँ चलाओ लेकिन बात मराठी में ही करना.

तो भईया बात ऐसी है की डर सब को लगता है चाहे ठाकरे साहब ही क्यों ना हों. अब सब शांत हो गया अब निकलेंगे धीरे-धीरे अपने बिलों से और लगेंगे भौंकने.

9 responses to “राज ठाकरे की बोलती बंद क्यों हो गई

  1. @डर सब को लगता है चाहे ठाकरे साहब ही क्यों ना हों. अब सब शांत हो गया अब निकलेंगे धीरे-धीरे अपने बिलों से और लगेंगे भौंकने.

    सच्चाई तो यही है.

  2. अब निकलेंगे धीरे-धीरे अपने बिलों से और लगेंगे भौंकने.

    एक दम कड़वी सच्चाई.. पर भौंकने की कूवत बिलों में रहने वालों के पास नहीं होती। अब तो उनके भौंकने को मिमियाहट या एक चूहे की चूं चूं से ज्यादा नहीं माना जाना चाहिये।

  3. कटु सत्य बेवाक बिंदास धन्यवाद.

  4. राज ठाकरे जैसे बिना रीढ के ईन्सान से आप ओर क्या उम्मीद कर सकते हैं

  5. ab chuhon ke baare mei nbolke waqt kya barbad karna,thakre bhi to deshi terrorist hai.

  6. aatankvaadiyo ki khabar dekh ke aavaj aise band ho gayi jaise halak me Vadapaav fans gaya ho.

  7. वाह मज़ा आगया मेरी मन को जैसे सटीक शब्द मिले हो बहुत बढिया ।

  8. ABE FATTUO AGAR DUM HAI TO SAMNE AA KAR BOL KAR DIKHAO

  9. jaayega kaha maharashtra main hi hoga vasey bhi ab jindgi bher maharashtra ke bhar to jaa nahi paayega abhi thodey din baad phir nikal aayega moka dekhker aur congress kaa support laker.