प्रगती मैदान में 5060 रू के दो प्लेट छोले-भठूरे – भाग 2

पिछले अंक से जारी

अब हम गेट न. पाँच से बाहर निकले. हमने वहाँ तैनात पुलिस वाले को बता दिया की हम फोन खोने की शिकायत करने जा रहे हैं और अभी वापिस आँएगे तो रोकना मत. वह मुस्कुराय और बोला जाओ.

हम वहाँ बने अस्थायी कमरे में गये. वहाँ दो काँस्टेबल बैठे थे. उनमें से एक से हमने कहा की शिकायत लिखवानी है, हमारा फोन किसी ने निकाल लिया है. उन्होंने के कहा – आपकी जो भी शिकायत है कृप्या लिख कर ले आयें. हमने यहाँ-वहाँ देखा और थोडी हिम्मत जुटाते हुऐ पूछा – क्या मुझे पेपर मिल सकता है. वहाँ एक महिला पुलिसकर्मी बैठी थीं उन्होंने हमें दो पेपर दिये और कहा डुप्लीकेट लाना कार्बन नहीं हैं. मैंने वहाँ पडे कार्बन पेपर के डब्बे को देखा और कहा ठीक है.

बाहर कुर्सीयाँ पडी थीं वहीं बैठ कर हम लिखने लगे. तभी देखा एक अधेड उम्र की महिला भी वहीं आ कर बैठ गयीं. मैं उन्हें देखते ही पहचान गया कि ये भी तो भठूरे खा रहीं थीं. उन्होंने पूछा – क्या हुआ पर्स चोरी हो गया. मैंने कहा जी नहीं किसी ने मोबाईल निकाल लिया. उन्होंने अफसोस जताया और कहा हमारे तो दस हजार रूपये चोरी हो गयी उसी भठूरे वाले स्टाल से. मैंने पूछा कैसे. अब जो वाक्या उन्होंने बताया उसे सुन कर हँसी आ रही थी. लेकिन प्रत्यक्ष में हम अफसोस ही जता रहे थे.

हुआ यूँ की उन्हें मेले से कुछ जरूरी खरीददारी करनी थी इसलिये वो घर से दस हज़ार लेकर निकले. उनमें से आठ हज़ार रूपय उन महिला ने और दो हज़ार रूपय उनके पतिदेव ने रख लिये. मेले में आने के बाद उनके पतिदेव ने उनसे कहा – तुम्हें तो अक्ल कम है तुम ऐसा करो की ये पैसे मुझे दे दो मैं अपने पर्स में रख लुंगा. उन्होंने दे दिये और पतिदेव ने अपने पर्स में दस हज़ार रूपय रखे और पर्स अपनी पिछली जेब में रख लिया. बस यहीं किसी पॉकेटमार की नज़र उन पर पड गयी और पर्स पर हाथ साफ कर दिया.

बहरहाल, हमने शिकायत लिखी और कमरे में जाकर कांस्टेबल महोदया को दिया. अब शिकायत पढ कर उन्हें बडा आश्चर्य हुआ. उन्होंने पूछा – भाई साहब कोई चोर आपकी जेब से फोन कैसे निकाल सकता है, जेब में तो फोन सेफ होता है. मैं तिलमिला कर बोला साहब जेब से ही चोरी हुआ है मेरे दोनों हाथों में तो भठूरे थे. और साहब फिर ये जेबकतरे क्या करते हैं सारा दिन? ये जेबे ही तो साफ करते हैं – हमने एक ही साँस कह डाला. उन्होंने फिर समझाया – आप समझदार हो वो फोन आप ने कहीं गिरा दिया होगा. मैं बोला, “अगर मैं समझदार हूँ तो मैं गिरा कैसे सकता हूँ? उन्होंने फिर कहा – आप इसे दोबारा लिख कर लाओ और जहाँ-जहाँ “चोरी” शब्द लिखा है वहाँ-वहाँ “खो-गया” शब्द लिख कर लाओ.

मरता-क्या-ना-करता सारी शिकायत दोबारा लिखी और चोरी की जगह खोगया शब्द उपयोग किया.

और इस तरह दिल्ली पुलिस ने अपने खाते में चोरी का केस आने से पहले ही खत्म कर दिया.

जय हो दिल्ली पुलिस की…

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5 responses to “प्रगती मैदान में 5060 रू के दो प्लेट छोले-भठूरे – भाग 2

  1. पिंगबैक: प्रगती मैदान में 5060 रू के दो प्लेट छोले-भठूरे « यह भी खूब रही।

  2. waah ji policewale,haan vaise aapke moblie khone ka gum hai, magar lekh bahut achha raha.
    वाह जी पुलिस वाले!!! हाँ आपका मोबाईल खो जाने का दुख है, मगर आपका लेख बहुत अच्छा रहा.

  3. hamara matlab tha ke aapke mobile khone ka gum hai,typing misttake thik karade pl

  4. Kamchor,haramkhor aur ghooskor hai ye dellhi inki jay ho. Ye public se bhi apni marji se complain likhwati hai