प्रगती मैदान में 5060 रू के दो प्लेट छोले-भठूरे

मैं सपरीवार प्रगती मैदान (दिल्ली – 16.11.2008) के व्यपार मेले का लुत्फ उठाने गया. हमेशा की तरह ऑटो वाले से झगडा करने के बाद करीब 2.30 बजे मैं प्रगती मैदान गेट न. 4 पर पहुँच गया. लेकिन वहाँ पर टिकिट की बिक्री नहीं हो रही थी. तब अकेले जाकर मैं प्रगती मैदान कि मट्रो स्टेशन से टिकिट ले कर आ गया. टिकीट 50 रू की एक थी. अगर मैं मदर डेयरी से लेता तो 10 रू कम में मिल जाती.

करीब 2.45 पर चार न. गेट से हमने प्रवेश किया. बहुत भूख लगी थी इसलिये सबसे पहले कुछ खाने का मन बनाया. खाने का स्टाल ढुंढते-ढुंढते डिफैंस के पवेलियन से गुज़रे तो देखा डाग शो चल रहा था. हम देखने के लिये रूक गये. सीढीयाँ चढने से लेकर आग के घेरे से कुदना, अपने ट्रेनर का कहना मानना, बडे ही अच्छे ढंग से उन कुत्तों को ट्रेन्ड किया था. कुछ फोटो भी क्लिक किये.

15-20 मिनट गुज़ारने के बाद भूख ने फिर आँतों को झिंझोडा तब ध्यान आया की पहले कुछ खा ही लें तो बेहतर होगा. वहीं डिफेंस पवेलियन के पास ही फूड कोर्ट था हम बस वहीं घुस गये. वहाँ की भीड ऐसी थी जैसे माता का भँडारा लगा हो. वहाँ पाकिस्तानी स्टाल भी लगे थे जो मटन व कीमा-रोटी बेच रहे थे. हमने चुपचाप छोले-भटूरों पर जान छिडकी और दो प्लेट के लिये कूपन ले लिये. अब पहुँचे काउंटर पर, वहाँ लगी हुई थी लाईन. अब कभी बस की लाईन तक में तो हम लगे नहीं तो इस लाईन में कौन लगे. हमने एक चाल चली. हम काउंटर पर तैनात मोटे से कह – भाई दो प्लेट भटूरे साहब ने मँगवाए हैं. साहब से कह दो की भटूरे ख्त्म हो गये हैं, उसने फुर्ती से जवाब दिया. मैं चुपचाप जा कर लाईन में लग गया. कोई 20 मिनट के बाद हमारा नम्बर आया. भटूरे की दोनों प्लेटें अपने हाथों में आते ही हम फिर गुर्राये – अरे भाई साहब पूरी नहीं भटूरे माँगे थे. हाँ-हाँ ये भटूरे ही हैं – मोटा बोला. अरे यार ये कहाँ से भटूरे हैं. इनमें तो आर पार दिख रहा है… इतने पतले. चलो भाई साहब साइड हो जाइये… चलिये बहुत लोग हैं.

हमने अपनि धर्मपत्नी जी को कहा – चलो बाहर पार्क में बैठकर खाते हैं. बाहर ही पार्क की हरी-हरी घास पर हम विजयी मुस्कान के साथ खाने बैठ गये. आस पास परीयाँ भी थी. गाहे-बाहे उन पर भी नज़र डालना जरूरी था. तभी मेरी नज़र वहाँ बैठे कुछ युवकों पर पडी जो देखने में तो कुडा बीनने वाले लग रहे थे पर उनके हाथों में N-Serie के फोने थे. मैंने सोचा जब इन लोगों के पास इतने मँहगे फोन हैं तो फिर तो हमारा देश डवलप्ड देशों से भी आगे है. और एक हमारा फोन थका हुआ… थका हुआ… लेकिन कहाँ है कहाँ फोन… जेबें टटोली, बैग छान मारा… ओहो… हो गया कार्यक्रम. ध्यान आया वो भठूरे की लाईन में एक लडका काफी धक्का-मुक्की कर रहा था और फिर बिना कुछ लिये चुपचाप खिसक लिया था. वो कर गया काम. हमने धर्मपत्नी जी से कहा जरा हमारे फोन पर मिस कॉल मारना… अब उनका फोन भी बंद… शायद बैटरी खत्म थी.

मरता क्या ना करता. एक लडके से कहा – भाई साहब शायद किसी ने हमारा फोन चोरी कर लिया है जरा अपने फोन से कॉल करके देख लो. हाँ तो ध्यान से क्यों नहीं रखते फोन को – उसने जले पर नमक छिडका. भाई साहब प्लीज़. अच्छा नम्बर बोलो. … The number you have dialed is not rechable…. बंद कर दिया उसने फोन… सिम निकाल कर फेंक दिया है उसने. अब तो हमारा चेहरा घुटनों तक लटक गया. अब क्या होगा इतने सारे नम्बर थे, वो सब कहाँ से लाऊँगा… वो लडकियों के secret नम्बर और messages.

जैसे तैसे मन को समझाया और बचे हुए छोले-भटूरों को कुडेदान के हवाले कर सीधा भागे पुलिस को ढुँढने. एक पुलीस वाले से पूछा – साहब, हमारा फोन चोरी हो गया है शिकायत कहाँ लिखवायें. कहाँ सै चोरी हुआ, तनै ध्यान कोनी सै, घर छोड कै आता उसनै… वो जी गलती हो गई… आप जरा बता देते तो… गेट नम्बर पाँच के बाहर चला जा वहाँ थाना है वहाँ complaint लिखवादै…

दिल्ली पुलिस वालों की महानता की कहानी अगले अंक में….

9 responses to “प्रगती मैदान में 5060 रू के दो प्लेट छोले-भठूरे

  1. ky jaroorat thi jane ki….. bhai phone chori karwake aagaye

  2. ab phone mila ke nahin…. shayad tumahara phone isiliye switch off jaa raha hai….

  3. मैं शुरू में समझा शीर्षक में गलती है – ५०-६० की जगह ५०६० लिखा है! 🙂

  4. नहीं श्रीमान जी, हमने अपने मोबाईल की कीमत भी जोडी है. 🙂

  5. :)bhagwan kare aapka phone jaldi mile

  6. बहुत सस्ते में निबट गये, अभी चार छ: दिन पहले दो विदेशी पर्यटकों को सोनपुर के मेले में चार समोसे दस हजार में पड़े थे.. ना ना, उनका सेलफोन नहीं गुमा था, उनसे दुकानदार ने एक समोसे के २५००/- के हिसाब से वसूले थे। आयुर्वेदिक और जड़ी बूटियों से बने समोसे बता कर।
    🙂
    @ mehhekk
    इन्हें सेलफोन की कहां इतनी चिन्ता है, इन्हें तो सिमकार्ड की जिसमें इनकी सहेलियों के नंबर थे।
    😛

  7. Delhi police ke bare mein kya kahoon janaab
    Aaise aaise sawal poochhte hain ke kya kehne

    Ek baar mera fone New Delhi Railway Station par chori hua tha
    Mai report likhwane gaya to poochhte hain, jis fone ke chori ke report likhwa rahe ho uski raseed leke aao ke tumhara hi tha.

    Maine kaha ke bhai mai bahut door rehta hoon, Sarita Vihar mein, to bole, raseed ke bina nahi likhenge.

    Khair baad mein maine report Sarita Vihar thaane mein hi likhwa di, aur kaha ke Sarita Vihar ke market mein chori hua hai. Naya sim lene ke liye FIR zaroori thi, warna wo nahin milta.

    Bhagwan bachaaye Dilli Police se…. aapki police ki karastani kahin na kahin samajh paa raha hoon.. Aur sirf kehne ke liye nahin kahunga ke aapka fone mil jaaye, ye dilli hai, yahan aadmi kho jaaye to nahin milta to phir ek phone ki kya bisaat

  8. कुछ दिन पहले सोनपुर के मेले में 4 समोसे 10,000 रूपए में बिक चुके है। मैने भी सोचा कि आप भी ठगे गए।

  9. पिंगबैक: प्रगती मैदान में 5060 रू के दो प्लेट छोले-भठूरे… भाग - 2 « यह भी खूब रही।