पापा, लो चाय पीलो…

आ गये पापा ऑफिस से, मुस्कुराते हुये मेरी बेटी ने पुछा. हाँ बेटी आ गया हूँ. पापा आप थक गये होंगे आपके लिये चाय बना दूं क्या? हाँ बेटी चाय बना दो. लो पापा पहले ये पानी पियो. ये बहुत ठंडा है इसमें थोडा गर्म पानी मिक्स कर लो. अच्छा बेटी मैंने मिक्स कर लिया. पापा ग्लास मुझे दे दो नहीं तो टूट जायेगा.

पापा आज मैं तो अनी के घर गयी थी. मैंने जूस पिया था उसके घर पर. पापा चीनी डाल दी है चाय में. पापा कप दे दो मुझे चाय डाल दूंगी आपके लिये, प्लीज़.

लो पापा यहाँ पर बैठो मेरे पास. पीलो चाय. फूंक मार कर पीना अभी तो ये गर्म है. बिस्किट भी खा लेना. मैंने तो खा लिया था सुबह.

मेरी दो साल की बेटी मेरे ऑफिस से आने के बाद रोज ऐसे ही अपने खिलोने वाले खाली बर्तनों में पानी और चाय बना कर पिलाती है. और मुझे भी उसके खाली बर्तनों की चाय एक संतुष्टी और अजब सी ताज़गी का एहसास करवाते हैं.

9 responses to “पापा, लो चाय पीलो…

  1. यही तो है ज़िंदगी. पूरा आनंद लें. आभार.

  2. आप भी बड़े खुशनसीब हैं… इतनी प्यारी जो है आपकी बच्ची.

  3. वाह! मेरे बेटी जब छोटी थी तो मेरे बालों से काल्पनिक जुयें निकाला करती थी। क्या सुख था!

  4. अच्छी औलाद का होना मां बाप को कितना सुख देता है।

  5. बेटियों का अपने माता-पिता के प्रति यह जन्मजात लगाव, स्नेह, चिंता (केयर) उम्र भर रहती है।

  6. बचपन की यह सुन्दर यादें सदाबहार रहेगीं…

  7. masum bachpan kitna mitha hota hai aur beti ki chai bhi,sundar baat

  8. apki bat padhker mujhe apni bachchi ki yad aa gayee.

  9. पिंगबैक: ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा : चिट्ठा चर्चा