होठों पर कोई प्यास रखो…

तुम भूल जाओ या याद रखो,
कोई आयेगा इसकी आस रखो.

धूप में पिघल जायेंगे सपने,
जुल्फों की छाँव पास रखो.

हौंसलें बुलंद हैं अगर तुम्हारे,
आसमां पर कभी पाँव रखो.

आँखों में जो सपने तैरते हैं,
इनका भी कोई नाम रखो.

रातों के साये से डरते हो तो,
किसी की दुआँएं साथ रखो.

जाम बाद में उठाना पहले,
होठों पर कोई प्यास रखो.

7 responses to “होठों पर कोई प्यास रखो…

  1. good one…

    हौंसलें बुलंद हैं अगर तुम्हारे,
    आसमां पर कभी पाँव रखो.

  2. आँखों में जो सपने तैरते हैं,
    इनका भी कोई नाम रखो.

    very well अच्‍छा लिखा है आपने

  3. एक अच्छी गजल पढ़वाने के लिए धन्यवाद

    गजल की क्लास चल रही है आप भी शिरकत कीजिये http://www.subeerin.blogspot.com

    वीनस केसरी

  4. हौंसलें बुलंद हैं अगर तुम्हारे,
    आसमां पर कभी पाँव रखो.

    waah bahut hi badhiya

  5. रोशनी चॉद से होती सीतारो से नही मोहबत एक से होती है हजारो से नही

  6. प्रकाश से हि प्रकाशमान होता?