बेटी

1.
बेटी
पेट में
सपने
सजा रही है,
माँ
ऑटो से
अबौर्शन के लिये
जा रही है

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2.
बेटी के जन्म पर
सांत्वना देते हैं
लोग
जैसे देते हैं
किसी की
मौत होने पर
…”दुखी ना हो, भगवान को यही मंज़ूर था”

8 responses to “बेटी

  1. ” painful and shameful, what else to say” kadva ghut hai peena pdega…”

    Regards

  2. पढ़कर स्तब्ध रह गए है ।

    पर ये सच्चाई भी है।

  3. सच्‍चाई और ऐसी सच्‍चाई जो दुखी करे साथ में सभी को शर्मिंदा भी करे बेहद अफशोश जनक हैं हरकतें और आपने शब्‍दों में जो पिरोया है बेमिसाल कमाल

  4. इस विडम्बना को काट फेंकना होगा। हम सभी इसका मन बना लें तो परिस्थितियाँ सुधार के अनुकूल दिखती हैं।… केवल दुःख प्रकट करके बैठ जाना पर्याप्त नहीं है।

    आपने कविता के माध्यम से इस दिशा में कदम बढ़ाया, इसके लिए साधुवाद।

  5. एक बेटी ही “माँ” की भावनाओं को समज सकती है और कुटुंब को जोडे रखती है।
    पोस्ट के लिये धन्यवाद\

  6. kal mere pados me bhi yehi hua. “kisi” ne munh latka kar bataya: “meri bhabhi ko beti hui hai.” AAH…! HUM BHAARTIY KAB SUDHRENGEY?