गरीबी

-: गरीबी :-

1.
कूडे के ढेर से,
ब्रैड का पैकेट उठाते हुए,
एक बच्चे ने,
अपनी माँ से पूछा,
“माँ, यह केक है?”
हाँ बेटा,
हमारे लिये केक,
और अमीरों के लिये,
एक्सपायर हुई डबलरोटी.

2.
भूख से बिलखते बच्चे को,
माँ ने सांत्वना दी,
बेटा, “पिताजी,
खाना लाते ही होंगे…”
और पिता सोचता है,
घर जाकर,
खाऊँगा खाना,
बिवी ने बनाया होगा.

3.
बाढ में
बहती फसलें,
बहते घर,
और बहते बच्चे को,
देखता है,
आदमी,
बेबस
और
लाचार.

12 responses to “गरीबी

  1. bahut gahri abhivyakti….

  2. ओह! हमने तो सोचा ही नहीं ऐसा।
    बहुत सूक्ष्म अवलोकन।

  3. पल्लवी जी उत्साहवर्धन के लिये आभार.

  4. ज्ञान दत्त जी नमस्कार,
    आपकी टिप्प्णी पढकर मैं अपने आप को धन्य समझता हूँ.
    आपका आभारी

  5. मार्मिक क्षणिकायें..पूरी बात कहती हुई. बहुत बढ़िया.

  6. बहुत सही और मार्मिक लिखा है आपने ..

  7. बहुत मार्मिक…
    आपके ब्लॉग पर पहली बार आया. बहुत खुशी हुई, आपका ब्लॉग पढ़कर.

  8. har pankti dil ko chu lene wali marmik rachana,bahut badhai

  9. Hi Naresh,

    Good to know that you have sensitive writer in you.

    Keep it up !!!

    Best Wishes,
    Mukul

  10. भाइयो मेरा नाम कमलेश है ओर एक गाँव मे रहता हु ।हमारे देश आज प्रत्येक देश मे तकनीकी,शिक्षा,तथा समरती,मे प्रथम रहता अगर ये बेरोजगारी ना रहती ,भाईयो ईस देश से गरीबी तभी मिटेगी जब भारत एक होगा और यह तभी सँभव हे जब ईस देश से भ्रटाचार मिटेगा