जब कली तेरे होठों की खिलने लगे

जिंदगी में कभी ऐसी शामें सजें,
सितारे जहाँ मेरे मेहमां बनें.

समां इस तरह कुछ सजाऊँगा मैं,
बस तेरी ही तेरी ही बातें चलें.

चाँद मेरा जमीं पर उतर आयेगा,
जब माथे पे तेरे ये बिंदिया सजे.

देख फूलों को भँवरे मचल जाते हैं,
जब कली तेरे होठों की खिलने लगे.

जब मुझे देख कर मुस्कुराती हो तुम,
दिल की बातें मुझे तेरे नयना कहें.

समंदर में दिल के भँवर उठ गये,
मेरे काँधे पे जब तेरी जुल्फें गिरें.

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4 responses to “जब कली तेरे होठों की खिलने लगे

  1. चाँद मेरा जमीं पर उतर आयेगा,
    जब माथे पे तेरे बिंदिया सजे.

    I liked this one.. Its really touching.
    Keep it up

  2. IT IS THE STUNNING ONE

    VERY GOOD

  3. देख फूलों को भँवरे मचल जाते हैं,
    जब कली तेरे होठों की खिलने लगे.
    ye acha hai