कृपया गलतीयाँ निकालें

कुछ क्षणिकाँएं लिखने की कोशिश की है. कृपया गलतीयाँ निकालें.

स्कुल जाते
बच्चे,
घर बिठायी जाती
बच्चियां.

मस्जिदों में
अजान,
घर में
फाके.

स्कूलों में बंदूकें
बंदूकों के स्कूल
वजह इसकी?
गलती किसकी?

अक्लमंद
खुदा,
ताले में
बंद हुआ.

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7 responses to “कृपया गलतीयाँ निकालें

  1. मस्जिदों में
    अजान,
    घर में
    फाके.

    good one….

  2. बहुत ही सुंदर कविता लिखी है आपने बेहद सच्‍ची वाह मैं आपकी कविता लिखने के ढंग को सलाम करता हूं

  3. मोहन वशिष्‍ठ जी,
    उत्साह वर्धन के लिये धन्यवाद.

  4. गलती तो यही है कि एक अकेले अल्लाह के लिये इतना बड़ा मकान (मस्जिद)! और बाकी जनता दड़बे में!

  5. भाव बेहतरीन हैं. बधाई.

    बस, एक कन्फ्यूजन है:

    बच्चे = लड़के भी, लड़कियाँ भी…

    बच्चियाँ= लड़कियाँ

    🙂