तुम नारी हो

तुम नभ हो,
मेघ हो,
गर्जन हो,
तुम धरती पर व्याप्त शक्ति, प्रजनन हो.

तुम आग हो,
शीतल हो,
पानी हो,
इस जग से परे स्वर्ग में भी जानी-मानी हो.

तुम धैर्य हो,
गुस्सा हो,
प्यार हो,
तुम बच्चों पर लुटने वाला दुलार हो.

तुम कोमल हो,
सख्त हो,
नाजुक हो,
तुम भावनाओं से भी ज्यादा भावुक हो.

तुम कविता हो,
कथा हो,
छंद हो,
तुम जीवन का जीवन से संबंध हो.

तुम सागर हो,
नदी हो,
गहराई हो,
तुम इस असभ्य होते समाज की सच्चाई हो.

तुम नारी हो,
… बहन हो,
… पोती हो,
तुम जग में सबसे ज्यादा दुःख ढोती हो.

… तुम खुदा हो,
… इश्वर हो,
… नानक हो,
तुम संसार में सबसे अधिक पावन हो,
तुम संसार में सबसे अधिक पावन हो.

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5 responses to “तुम नारी हो

  1. तुम कविता हो,
    कथा हो,
    छंद हो,
    तुम जीवन का जीवन से संबंध हो.

    achhi ban padi hai

  2. इतनी ज्यादा तारीफ़ को आज की प्रगतिशील नारी अपने खिलाफ षड़यंत्र मानती है.