माँ संवेदना है तो पिता क्या है? ओम व्यास जी की कविता

Om Vyas Ji

पिता…पिता जीवन है, सम्बल है, शक्ति है,
पिता…पिता सृष्टी मे निर्माण की अभिव्यक्ती है,
पिता अँगुली पकडे बच्चे का सहारा है,
पिता कभी कुछ खट्टा कभी खारा है,
पिता…पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है,
पिता…पिता धौंस से चलना वाला प्रेम का प्रशासन है,
पिता…पिता रोटी है, कपडा है, मकान है,
पिता…पिता छोटे से परिंदे का बडा आसमान है,
पिता…पिता अप्रदर्शित-अनंत प्यार है,
पिता है तो बच्चों को इंतज़ार है,
पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं,
पिता से परिवार में प्रतिपल राग है,
पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग है,
पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ती है,
पिता गृहस्थ आश्रम में उच्च स्थिती की भक्ती है,
पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ती है,
पिता…पिता रक्त निगले हुए संस्कारों की मूर्ती है,
पिता…पिता एक जीवन को जीवन का दान है,
पिता…पिता दुनिया दिखाने का एहसान है,
पिता…पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
तो पिता से बडा तुम अपना नाम करो,
पिता का अपमान नहीं उनपर अभिमान करो,
क्योंकि माँ-बाप की कमी को कोई बाँट नहीं सकता,
और ईश्वर भी इनके आशिषों को काट नहीं सकता,
विश्व में किसी भी देवता का स्थान दूजा है,
माँ-बाप की सेवा ही सबसे बडी पूजा है,
विश्व में किसी भी तिर्थ की यात्रा व्यर्थ हैं,
यदि बेटे के होते माँ-बाप असमर्थ हैं,
वो खुशनसीब हैं माँ-बाप जिनके साथ होते हैं,
क्योंकि माँ-बाप के आशिषों के हाथ हज़ारों हाथ होते हैं
क्योंकि माँ-बाप के आशिषों के हाथ हज़ारों हाथ होते हैं

17 responses to “माँ संवेदना है तो पिता क्या है? ओम व्यास जी की कविता

  1. Very good, first time ever read something about father…..

    sanjay….

  2. पहली बार सोचा की पिता के बारे में कुछ लिखू -तो सोचा की क्यों ना पहले देख लू किसी लिखा भी है या नही
    लेकिन आप का प्रयाश अच्छा लगा

  3. pahli bar pita ke bare me padne ka man kiya to aap ki kavita pad
    kar achchha laga.D?

  4. Bahut badiya likha maza aa gya ……….. I love my Father

  5. Bahut badiya likha ……maza aa gya ……….. I love my father

  6. om g aap bhale hi is duniya me na ho pr apki maa or pita dono kavitayen salon tk amar rahegi.
    maine apko khub live suna hai indore me.
    malwa mill ka kavi sammelan apke bin adhura sa lagta hai.

  7. OMG ka prayas pita diwas per pita ke liye samarpan ki yadon ko taza karta hai.
    LALIT UPADHYAYA UDAAN Society ALIGARH

  8. i have losted my father a day before my birth..bt i love him too much……..kavita pdkr mja aa gya or unki yad bhi……..

  9. पिता…पिता जीवन है, सम्बल है, शक्ति है,
    पिता…पिता सृष्टी मे निर्माण की अभिव्यक्ती है….

  10. mere sath is samay ek dorbhagya purn ghatana ghatita hui ese mai padhakar muze bhot acha laga lekin aaj ki youa varga kah samazega.

    ,

  11. Pitaa ke liye isase mahaan shabdawali wali rachna to aur koi ho hi nahi sakti, aapne is rachna ke sahaare pitaa shabd ke saath bahut hi nyaay kiyaa hai.
    mai aapka aabhaar vyakta kartaa hun.

  12. sachh aapne kitna sundar likha h pita ke bare me i love my babu ji

  13. एक पोस्ट पिता के नाम
    माँ का गुणगान तो हम हमेशा ही करते है,
    पर बेचारे पिता ने क्या बिगाड़ा है,
    संकट से मुक्ति का मार्ग वही तो बताता है।
    अगर माँ के पास है आंसू का दरिया,
    तो पिता के पास संयम का अस्त्र है।
    हमें याद रहती है खाना बनाने वाली माँ,
    पर उस खाने का इंतजाम पिता ही तो करता है।
    देवकी और यशोदा का प्रेम मन में रखिये,
    पर टोकरी में ले जाने वाले पिता को भी याद रखिये।
    पुत्र वियोग पर कौशल्या बड़ी रोई थी तो,
    दशरथ तो पुत्र वियोग में स्वर्ग ही सिधार गये थे।
    समय पर माँ होमवर्क पूरा करवा देती है, पर
    उधर लेकर डोनेशन देकर प्रवेश पिता ही दिलाता है।
    ससुराल को विदा जब होती है बेटियां तो ,
    माताएं धाड़-धाड़ आंसू बहा रो देती है, पर
    मेरी गुडिया का पूरा ख़याल रखना हाथ जोड़कर
    खून के आंसू रोता पिता ही तो कहता है।
    पिता बचत कर कर के नई नई जींस लाता हैं
    पर खुद तो पुरानी शर्त पेंट ही पहनता है !!!!!

  14. very nice aise mahanadi rachanakar ko mera sat-sat naman.