Daily Archives: अगस्त 16, 2007

अल्हड बिकानेरी की सरकार बन क्यों नहीं जाने देते? – हास्य कविता –

अल्हड बिकानेरी की एक मज़ेदार कविता

जो बुढ्ढे खूसट नेता हैं, उनको खड्डे में जाने दो ।
बस एक बार, बस एक बार मुझको सरकार बनाने दो ।

मेरे भाषण के डंडे से
भागेगा भूत गरीबी का ।
मेरे वक्तव्य सुनें तो झगडा
मिटे मियां और बीवी का ।

मेरे आश्वासन के टानिक का
एक डोज़ मिल जाए अगर,
चंदगी राम को करे चित्त
पेशेंट पुरानी टी बी का ।

मरियल सी जनता को मीठे, वादों का जूस पिलाने दो,
बस एक बार, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो ।

जो कत्ल किसी का कर देगा
मैं उसको बरी करा दूंगा,
हर घिसी पिटी हीरोइन कि
प्लास्टिक सर्जरी करा दूंगा;

लडके लडकी और लैक्चरार
सब फिल्मी गाने गाएंगे,
हर कालेज में सब्जैक्ट फिल्म
का कंपल्सरी करा दूंगा ।

हिस्ट्री और बीज गणित जैसे विषयों पर बैन लगाने दो,
बस एक बार, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो ।

जो बिल्कुल फक्कड हैं, उनको
राशन उधार तुलवा दूंगा,
जो लोग पियक्कड हैं, उनके
घर में ठेके खुलवा दूंगा;

सरकारी अस्पताल में जिस
रोगी को मिल न सका बिस्तर,
घर उसकी नब्ज़ छूटते ही
मैं एंबुलैंस भिजवा दूंगा ।

मैं जन-सेवक हूं, मुझको भी, थोडा सा पुण्य कमाने दो,
बस एक बार, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो ।

श्रोता आपस में मरें कटें
कवियों में फूट नहीं होगी,
कवि सम्मेलन में कभी, किसी
की कविता हूट नहीं होगी;

कवि के प्रत्येक शब्द पर जो
तालियाँ न खुलकर बजा सकें,
ऐसे मनहूसों को, कविता
सुनने की छूट नहीं होगी ।

कवि की हूटिंग करने वालों पर, हूटिंग टैक्स लगाने दो,
बस एक बार, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो ।

ठग और मुनाफाखोरों की
घेराबंदी करवा दूंगा,
सोना तुरंत गिर जाएगा
चाँदी मंदी करवा दूंगा;

मैं पल भर में सुलझा दूंगा
परिवार नियोजन का पचडा,
शादी से पहले हर दूल्हे
की नसबंदी करवा दूंगा ।

होकर बेधडक मनाएंगे फिर हनीमून दीवाने दो,
बस एक बार, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो ।
बस एक बार, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो ।

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