जैमिनी हरियाणवी की एक हास्य कविता

एक दिन
एक पडोस का छोरा
मेरे तैं आके बोल्या
‘चाचा जी अपनी इस्त्री दे देयो’

मैं चुप्प
वो फेर कहण लागा:
‘चाचा जी अपनी इस्त्री दे देयो ना?’

जब उसने यह कही दुबारा
मैंने अपनी बीरबानी की तरफ करयौ इशारा:
‘ले जा भाई यो बैठ्यी’

छोरा कुछ शरमाया, कुछ मुस्काया
फिर कहण लागा:
‘नहीं चाचा जी, वो कपडा वाली’

मैं बोल्या,
‘तैन्नै दिखे कोन्या
या कपडा में ही तो बैठी सै’

वो छोर फिर कहण लगा
‘चाचा जी, तम तो मजाक करो सो
मननै तो वो करंट वाली चाहिये’

मैं बोल्या,
‘अरी बावली औलाद,
तू हाथ लगा के देख
या करैंट भी मारयै सै’

13 responses to “जैमिनी हरियाणवी की एक हास्य कविता

  1. मजेदार. कहां से ढूंढ लाये भाई. कुछ इसी तरह का और

  2. 🙂 हा हा..करेंट मारा कि नहीं..बहुत बढ़िया.

  3. जैमिनी जी की और रचनाएं भी प्रेषित करें । हम कभी उन्हें रेडियों टी वी पर सुनते थे कभी_कभी ।बढिया रचना है।

  4. main Kanpur mein aapako sun chuka hun kavi sammelano mein, yah kavita padhakar anand aa gaya

  5. जोगलिखी संजय पटेल की

    जैमिनीजी हास्य कविता के उस दौर के हस्ताक्षर थे जब काव्य में वाक़ई गरिमामय हास्य होता था.आज ये आलम है के लाँफ़्टर चैलेंज वाले हास्य कविताएं सुना रहे हैं और हास्य काव्य मंचों पर चुटकुले सुनाए जा रहे हैं. प.गोपाल व्यास,काका हाथरसी,बेढ़ब बनारसी,से लेकर शरद जोशी और के.पी.सक्सैना तक अनूठा हास्य अब कहाँ ? आज हास्य कविता मैं नब्बे फ़ी सदी राजनीति भरी पड़ी है. परिवार परिवेश के सरल हास्य अब बीते कल को हो चुके.

  6. उत्साह वर्धन के लिये आप सभी का बहुत धन्यवाद

  7. बहुत ख़ूब ! आश्चर्य तो इस बात का है कि इतने करंट लगने के बाद भी हास्य कवि है।

  8. wonnderfullllllllllllllllllllllllllllllllllll!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!…..

  9. Jamni ji ka jabab nahi hai

  10. मजा आ गा
    लखदे रो