ऐसी दुकानें जहां कोई दुकानदार नहीं

एजल [मिजोरम]। आमतौर पर दुकान में सामान बेचते दुकानदारों को तो आपने सब जगह देखा होगा, लेकिन ऐसी दुकानें नहीं देखी होगी जहां कोई दुकानदार ही न हों। आप सोच रहें होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है, लेकिन मिजोरम में बिना दुकानदार के दुकान की अवधारणा काफी लोकप्रिय हो रही है।

यहां लोग काफी दूर से पैदल चलकर सामान खरीदने आते हैं और दुकान में किसी भी दुकानदार के मौजूद नहीं होने के बावजूद सामान लेकर ईमानदारी के साथ वहां रखे बक्से में पैसे रखते है और चले जाते हैं। यहां से 70 किलोमीटर दूर सिलींग और कीफंग गांव में हरेभरे जंगलों के बीच स्थित ये दुकानें इस रास्ते से गुजरने वाले थके मांदे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। मणिपुर की सीमा से लगे मिजोरम के इस पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहुंचने के लिए राजधानी एजल से करीब सात घंटे की थकान भरी ड्राइविंग करनी होती है।

हालांकि, रास्ते में पड़ने वाली ऐसी अनेक दुकानों को जिसे स्थानीय भाषा में ‘नगाहलोह दावर’ कहते हैं। इससे ताजी हरी सब्जियां, फल और अंडों को खरीदने में किसी के द्वारा बाधा नहीं पहुंचाई जा सकती है। ऐसी एक दुकान के मालिक और किसान वनलालदिका (29) अपनी पत्नी और बच्चों के साथ नजदीक के ही एक गांव में रहते हैं और पिछले तीन वर्षोसे उनके जीवनयापन का मुख्य साधन दुकान ही हैं। हर सुबह वनलालदिका सब्जियां अपने दुकान में लगाता है और वहां एक छोटा बक्सा रख वहां से एक किलोमीटर दूर अपने खेत में चला जाता है। जो लोग वहां से गुजरते हैं ताजी सब्जियां खरीदकर उतने पैसे बक्से में डाल जाते हैं।

वहीं, वनलालदिका ने संवाददाता को बताया कि कोई भी हमारी सब्जियां नहीं चुराता है। मैं एक छोटे कार्डबोर्ड पर उन वस्तुओं की कीमत लिख उसके पास ही रख देता हूं। लोग यहां अक्सर आकर सब्जी और फल खरीदते हैं और दुकान से जाने से पहले पैसे बक्से में डाल जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनके पास खुले पैसे नहीं होते हैं तो वे बक्से से निकाल लेते हैं। उन्होंने कहा कि वह चार से पांच सौ रुपये प्रतिदिन कमा लेते हैं।

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6 responses to “ऐसी दुकानें जहां कोई दुकानदार नहीं

  1. वाह! क्या बात है, अच्छा लगा जानकर!

  2. पंकज बेंगाणी

    ya khub rahi. bhai vah

  3. यदि ऐसे ही सब लोग ईमानदार हो जाएँ तो देश की तरक्की की गति कई गुणा बढ़ जाएगी।

  4. वाह। बहुत अच्छा लगा यह सब जानकर।

  5. yeh hai asli hindustan ki baat. janha aaj bhi imaandar log rahte hain. kuch papyon ko chhodkar.