“फिर क्या होगा उसके बाद?”

बालकृश्न राव जी कि कविता “फिर क्या होगा उसके बाद?” आज सुबह ना जाने कैसे ध्यान आ गयी। अन्तर जाल पर ढुंढा तो मनीष जी के ब्लाग पर मिल गयी, किंतु वह अंग्रीजी में थी। सोचा क्युं ना इसका हिन्दी रूपांतरण किया जाय। बस ऊंगलीयाँ शुरु हो गयीं।

फिर क्या होगा उसके बाद?
उत्सुक होकर शिशु ने पुछा,
माँ क्या होगा उसके बाद?

रवि से उज्जवल शशि से सुन्दर,
नव-किसलय दल से कोमलतर,
वधू तुम्हारे घर आयेगी,
उस विवाह उत्सव के बाद।

पलभर मुख पर स्मित की रेखा,
खेल गयी फिर माँ ने देखा,
उत्सुक हो कह उठा किन्तु वो,
फिर क्या होगा उसके बाद?

फिर नभ के ये नक्षत्र मनोहर,
स्वर्ग लोक से उतर उतर कर,
तेरे शिशु बनने को मेरे,
घर आयेंगे उसके बाद।

मेरे नये खिलौने लेकर,
चले ना जायें वो अपने घर,
चिंतित हो कह उठा किंतु वो,
फिर क्या होगा उसके बाद?

अब माँ का जी ऊब चुका था,
हर्श श्रान्ति मे डूब चुका था,
बोली फिर मैं बुढी होकर,
मर जाऊंगी उसके बाद।

ये सुनकर भर आये लोचन,
किन्तु पोंछकर उसे उसे क्षण,
उत्सुक होकर कह उठा फिर वो,
फिर क्या होगा उसके बाद?

कवि को बालक ने सिखलाया,
सुख दुख है पलभर कि माया,
है अनन्त का तत्व प्रश्न ये,
फिर क्या होगा उसके बाद?

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6 responses to ““फिर क्या होगा उसके बाद?”

  1. अच्छा रुपांतरण किया है, साधुवाद.

  2. भाई आपने हिंदी में खोजा होता तो आपको राव जी कि ये कविता मेरे हिंदी चिट्ठे पर भी मिल जाती. पिछले साल जुलाई में पोस्ट की थी
    http://ek-shaam-mere-naam.blogspot.com/2006/07/blog-post_26.html
    बहरहाल, जानकर खुशी हुई कि आपको भी ये कविता उतनी ही पसंद है जितनी मुझे।

  3. मनीष जी,
    क्षमा प्रार्थी हुँ, शायद मैंने ज्यादा कोशिश नहीं की।

  4. chahe kissi ke bhi chithe main ho …asal baat to yeh hai ki yeh kavita achhi hai

  5. for a long time I was also searching for this poem, unfortuntely, it was not available. today I found it on your blog. Thanks

  6. Aaj bahut dino ke baad meine ye kavita padhi, aur anand bivor ho gaya. Mein kabhi kabhi hi kavita padh pata hun. Ye kavita mere bal jivan ki yaadon to taza kar deta hai. Mere hindi ke shikshak, jab class room mein hamen hamare text book ki kavitayen padhate aur uska matlab samjhate the. Sara dirisya mere aankhon ke samane tha.