प्रंशसा से परोपकार

दूसरे महायुद्ध की बात है। एक जापानी सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया था, काफी रक्त बह चुका था, ऐसा लग रहा था, वह कुछ ही क्षणों का मेहमान है। एक भारतीय सैनिक की मानवता जागी, शत्रु है तो क्या? मरते हुये को पानी देना, मानवता के नाते धर्म है। म्रत्यु के आखिरी क्षणों में शत्रुता कैसी? उसने अपनी बोतल से पानी निकाला, घायल सैनिक के मुँह से लगाया बोला-मित्र बुद्ध के देश में इस सैनिक के हाथों की वीरता, युद्ध भूमि में देख चुके हो। अब स्नेह भी देखो, जल पीओ।

किन्तु उस दुष्ट ने दया का बदला यह दिया कि अपने चाकू से भारतीय सैनिक को घायल कर दिया। रक्त की धार बह चली, घायल हो भारतीय सैनिक गिर पडा। दोनों ही सैनिकों को भारतीय अस्पताल पहुँचाया गया। दोनों ही की मरहम पट्टी की गई। धीरे-धीरे दोनों ही ठीक हो गये।

ठीक होने पर फिर भारतीय सैनिक, जापानी सैनिक से मिलने चला गया। उसकी कुशलक्षेम पूछी और फिर चाय का प्याला दिया, गरम-गरम चाय पिलाई। जापानी सैनिक का मन पश्चाताप से भर उठा, उसे अपने किये पर आत्मग्लानी हो रही थी। उसने भारतीय सैनिक से कहा दोस्त अब मैं समझा कि बुद्ध का जन्म तुम्हारे देश में क्यों हुआ था।

मनुष्य की सोई हुई मानवता कभी भी जाग्रत हो कर परोपकार के अदभुत कर्म करा सकती है। वे कार्य जो मनुष्य किसी भी सांसारिक लोभ के वश में होकर नहीं करता, अन्तरात्मा के दैवी प्रभाव में एकाएक कर बैठता है। अन्दर की अन्तरात्मा जाग कर उसे परोपकार के शुभकार्यों की ओर तीव्रता से प्रेरित करती है।

वस्यो भूयाय वसुमान यज्ञ वसु वंशिषीय, वसुमान भूयासं वसु मयि धेहि..

मनुष्यों, ईश्वर पर पूर्ण आस्था रखो और इस संसार में परोपकार करते हुए श्रेष्ठ पद प्राप्त करो। परोपकार की पूंजी सदा अक्षय कीर्ती देने वाली दैवी विभूति है। परोपकारी इस लोक में प्रसन्न रहता है और मरने के बाद भी सदा याद किया जाता है।

अधा नो देव सवितः
प्रजावत सावीः सौबगम्
परा दुःस्वप्नय सुव।।

जो ईश्वर की आराधना के साथ साथ पुरूषार्थ और परोपकार करते हैं, उनके दुख दारिद्रय दूर होते हैं और ऐश्वर्य बढता है।

कहा जाता है कि संसार में कोई भी व्यक्ति बुरा नहीं होता, श्रेष्टता का अंश सभी में होता है। जरूरत बस एक ऐसे व्यक्ति की होती है, जो अच्छाई को लगातार प्रोत्साहन देता रहे, अच्छे काम करने वालों को बढावा दे। बस दूसरों को अपने उत्तम गुण सक्रिय करने का मौका दिजीए, किसी में कोई भली बात या श्रेष्टता नजर आती है तो दिल खोलकर प्रशंसा कीजिए, प्रोत्साहन से उसका दैवीय पक्ष जाग उठेगा।

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3 responses to “प्रंशसा से परोपकार

  1. बहुत सुंदर विचार, प्रसंग अच्छा दिया।

  2. Aap ki yeh Entry bhi Khoob achhi lagi

  3. aapne jevan ke mulyon ko badi khubsurati se darsha diya …its jus awesome..ishwar prapti ke marg ko aapne ujyagar kar diya .