राहत ईन्दौरी के कुछ शेर –

राहत ईन्दौरी के कुछ शेर – Rahat Indori (राहत ईन्दौरी)

उसकी कथ्थई आखों में हैं जन्तर मन्तर सब
चाकू वाकू, छुरीयां वुरीयां, खन्जर वन्जर सब।

जिस दिन से तुम रुठी मुझसे रुठे रुठे से हैं
चादर वादर, तकिया वकिया, बिस्तर विस्तर सब।

मुझसे बिछुड कर वो भी कहाँ अब पहले जैसी है
भीगे पड गये कपडे वपडे, ज़ेवर वेवर सब।

One response to “राहत ईन्दौरी के कुछ शेर –

  1. Sir aap ke dvara likhi ye kahani bahut achi h
    isliye is se age ki kahani likh kar hame or. Prerna ka patha padhaye