यह भी खूब रही

ईश्वर का प्रमाण

April 16, 2008 · 6 Comments

एक दिन एक राजा ने अपने सभासदों से कहा, ‘क्या तुम लोगों में कोई ईश्वर के होने का प्रमाण दे सकता है?’ सभासद सोचने लगे, अंत में एक मंत्री ने कहा, ‘महाराज, मैं कल इस प्रश्न का उत्तर लाने का प्रयास करूंगा।’ सभा समाप्त होने के बाद उत्तर की तलाश में वह मंत्री अपने गुरु के पास जा रहा था। रास्ते में उसे गुरुकुल का एक विद्यार्थी मिला। मंत्री को चिंतित देख उसने पूछा, ‘सब कुशल मंगल तो है? इतनी तेजी से कहां चले जा रहे हैं?’

मंत्री ने कहा, ‘गुरुजी से ईश्वर की उपस्थिति का प्रमाण पूछने जा रहा हूं।’ विद्यार्थी ने कहा, ‘इसके लिए गुरुजी को कष्ट देने की क्या आवश्यकता है ? इसका जवाब तो मैं ही दे दूंगा।’ अगले दिन मंत्री उस विद्यार्थी को लेकर राजसभा में उपस्थित हुआ और बोला, ‘महाराज यह विद्यार्थी आपके प्रश्न का उत्तर देगा।’ विद्यार्थी ने पीने के लिए एक कटोरा दूध मांगा। दूध मिलने पर वह उसमें उंगली डालकर खड़ा हो गया। थोड़ी-थोड़ी देर में वह उंगली निकालकर कुछ देखता, फिर उसे कटोरे में डालकर खड़ा हो जाता। जब काफी देर हो गई तो राजा नाराज होकर बोला, ‘दूध पीते क्यों नहीं? उसमें उंगली डालकर क्या देख रहे हो?’ विद्यार्थी ने कहा, ‘सुना है, दूध में मक्खन होता है, वही खोज रहा हूं।’ राजा ने कहा, ‘क्या इतना भी नहीं जानते कि दूध उबालकर उसे बिलोने से मक्खन मिलता है।’ विद्यार्थी ने मुस्कराकर कहा, ‘हे राजन, इसी तरह संसार में ईश्वर चारों ओर व्याप्त है, लेकिन वह मक्खन की भांति अदृश्य है। उसे तप से प्राप्त किया जाता है।’ राजा ने संतुष्ट होकर पूछा, ‘अच्छा बताओ कि ईश्वर करता क्या है?’

विद्यार्थी ने प्रश्न किया, ‘गुरु बनकर पूछ रहे हैं या शिष्य बनकर?’ राजा ने कहा, ‘शिष्य बनकर।’ विद्यार्थी बोला, ‘यह कौन सा आचरण है ? शिष्य सिंहासन पर है और गुरु जमीन पर।’ राजा ने झट विद्यार्थी को सिंहासन पर बिठा दिया और स्वयं नीचे खड़ा हो गया। तब विद्यार्थी बोला, ‘ईश्वर राजा को रंक और रंक को राजा बनाता है।’

संकलन: चतर सिंह ‘लुप्त’ पारसौली
साभार : नवभारत टाइम्स

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6 responses so far ↓

  • ज्ञानदत्त पाण्डेय // April 16, 2008 at 3:29 pm | Reply

    जबरदस्त हाजिरजवाबी।

  • mehek // April 16, 2008 at 9:27 pm | Reply

    wah ji wah bahut badhiya kahani hai.

  • safat alam // July 29, 2008 at 11:21 am | Reply

    ईश्वर को हम क्यों मानें यह बात बौद्धिक तथा धार्मिक दोनों तरीक़े से प्रमाणित है । पर आज हम सब ईश्वर का नाम अवश्य लेते हैं परन्तु उसे पहचानते नहीं हैं । इस सम्बन्ध में मेरे विचार इस ब्लौग्य पर अवश्य देखें
    http://safat.ipcblogger.com/blog/?cat=5

    धन्यवाद

  • Manoj Gupta // September 29, 2008 at 5:39 pm | Reply

    bahut acchha hai. parantu aadmi samajhata kaha hai.

  • AJAY KUMAR // October 16, 2008 at 2:12 pm | Reply

    Ishwar mega power hai, vah kuch bhi kar sakta hai, Parantu hume to neak kaam hi karne chayae. Ishwar ke kya kahaine woh to Mahan hai. Parhbu ki baghti se bad kar kuch nahi……. Bolo JAI SHREE RAM

  • vineeta // April 28, 2009 at 11:17 am | Reply

    ishwar hai.sare sansar me hai,jeev jantu or har munisya me ishwar hai
    admi jab koi bura kam kartha hai to ishwar use roketa ha lekin wo admi
    samaj nahi pata,agar yh ishara samaj jaya to wo kabhi galat kam nahi karega.yh sbse bara sabut hai ki ishwar hai or har jagha hai dikhayi na de
    magar ishwar har admi ke andar hai.yhi satya hai. mene kai bar mahasus ki he, appni atma ka kahana jarur manana chaya,or jo nahi mante woh
    galat kam karthe he.or sabse bari ishwar pooja hai garivo ki sayata karana

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