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क्या वाकई भगवान हमें देख रहा है March 14, 2008

Posted by pryas in हितोपदेश.
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हमारे घर के पास एक डेरी वाला है. वह डेरी वाला एसा है कि आधा किलो घी में अगर घी 50२ ग्राम तुल गया तो 2 ग्राम घी निकाल लेता था.

एक बार मैं आधा किलो घी लेने गया. उसने मुझे 90 रूपय ज्यादा दे दिये. मैंने कुछ देर सोचा और पैसे लेकर निकल लिया. मैंने मन में सोचा कि 2-2 ग्राम से तूने जितना बचाया था बच्चू अब एक ही दिन में निकल गया. मैंने घर आकर अपनी गृहल्क्षमी को कुछ नहीं बताया और घी दे दिया. उसने जैसे ही घी डब्बे में पलटा आधा घी बिखर गया. मुझे झट से “बेटा चोरी का माल मोरी में” वाली कहावत याद आ गयी. और साहब यकीन मानीये वो घी किचन की सिंक में ही गिरा था.

इस वाकये को कई महीने बीत गये थे. परसों शाम को मैं एग रोल लेने गया. उसने भी मुझे सत्तर रूपय ज्याद दे दिये. मैंने मन ही मन सोचा चलो बेटा आज फिर चैक करते हैं की क्या वाकई भगवान हमें देखता है. मैंने रोल पैक कराये और पैसे लेकर निकल लिया. आश्चर्य तब हुआ जब एक रोल अचानक रास्ते में ही गिर गया. घर पहुँचा, बचा हुआ रोल टेबल पर रखा, जूस निकालने के लिये अपना मनपसंद काँच का गिलास उठाया… अरे यह क्या गिलास हाथ से फिसल कर टूट गया. मैंने हिसाब लगाय करीब-करीब सत्तर में से साठ रूपय का नुकसान हो चुका था. मैं बडा आश्चर्यचकित था.

और अब सुनिये ये भगवान तो मेरे पीछे ही पड गया जब कल शाम को सुभिक्षा वाले ने मुझे तीस रूपय ज्याद दे दिये. मैंने अपनी धर्म-पत्नी से पूछा क्या कहती हो एक ट्राई और मारें. उन्होने मुस्कुराते हुये कहा - जी नहीं. और हमने पैसे वापस कर दिये. बाहर आकर हमारी धर्म-पत्नी जी ने कहा - वैसे एक ट्राई और मारनी चाहिये थी. बस इतना कहना था कि उन्हें एक ठोकर लगी और वह गिरते-गिरते बचीं.

मैं सोच में पड गया कि क्या वाकई भगवान हमें देख रहा है.

Comments»

1. सागर चन्द नाहर - March 14, 2008

ऐसा प्रयोग मैं भी कम से कम तीन बार कर चुका। तीनो बार थोड़े से फायदे से खुश होने के बाद बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
भगवान हो ना हो पर इन प्रयोगों का परिणाम मेरे लिये सुखद नहीं रहा, दुकान दार को तो शायद 5-15 रुपये का नुकसान हुआ होगा पर मेरा सौ रुपये से कम नहीं हुआ।
बहुत बढ़िया पोस्ट ।

2. paramjitbali - March 14, 2008

बहुत अच्छी पोस्ट है।

3. mehek - March 14, 2008

beautiful post,:);)bhagwan sab dekhta hai.

4. राज भाटिया - March 14, 2008

जो पेसा आप मन्दिर,गुरदुवारे मे चढाते हे एक बार वो पेसे किसी जरुरत वाले कॊ बिना लोभ के, बिना अहसान जताये मदद के रुप मे देके देखो, फ़िर लिखना उस अहसास को,भगवान का तो पता नही, लेकिन खुशी लेने का यह आसान तारीका हे

5. Prashant Priyadarshi - March 25, 2008

Bahut badhiya kissa hai..
vaise bhagavaan mujhase bhaagte firte hain, meri taraf dekhte bhi nahi hain.. 36 ka ankadaa jo chalta hai mera unka.. :)

6. rakesh tripathi - March 25, 2008

Yah bat vakai satya hai kyonki agar ishwar ki satta nhi hai to aaj yah sab chl kaise raha hai scientiest akashganga tak phunch gaye par uska vistar kitna hai iska koi andaja nahin.

7. Brahama Deo Dixit - May 5, 2008

Yah to vastvikta hai.Bhagwan sab dekhta hai.Kisika hak kabhi nahi marna chahiyr.Mehn at ki kamai hi falti hai.