एक दिन अकबर और बीरबल महल के बागों में सैर कर रहे थे. फले-फूले बाग को देखकर अकबर बहुत खुश थे. वे बीरबल से बोले, “बीरबल, देखो यह बैंगन, कितनी सुनदर लग रहे हैं!” इनकी सब्जी कितनी स्वादिष्ट लगती है! बीरबल, मुझे बैंगन बहुत पसंद हैं. हाँ महाराज, आप सत्य कहते हैं. यह बैंगन है ही ऐसी सब्जी, जो ना सिर्फ देखने में ब्लकि खाने में भी इसका कोई मुकाबला नहीं है. और देखिये महाराज भगवान ने भी इसीलिये इसके सिर पर ताज बनाया है. अकबर यह सुनकर बहुत खुश हुआ.
कुछ हफ्तों बाद अकबर और बीरबल उसी बाग में घूम रहे थे. अकबर को कुछ याद आया और मुस्कुराते हुए बोले, “बीरबल देखो यह बैंगन कितना भद्दा और बदसूरत है और यह खाने में भी बहुत बेस्वाद है.” हाँ हुज़ूर, आप सही कह रहे हैं बीरबल बोला. इसीलिये इसका नाम बे-गुण है बीरबल ने चतुराई से नाम को बदलते हुए कहा.
यह सुनकर अकबर को गुस्सा आ गया. उन्होंने झल्लाते हुए कहा,”क्या मतलब है बीरबल?” मैं जो भी बात कहता हूँ तुम उसे ही ठीक बताते हो. बैंगन के बारे में तुम्हारी दोनों ही बातें सच कैसे हो सकती हैं, क्या तुम मुझे समझाओगे? बीरबल ने हाथ जोडते हुए कहा,”हुज़ूर, मैं आपका नौकर हूँ बैंगन का नहीं”.
अकबर यह जवाब सुनकर बहुत खुश हुए और बीरबल की तरफ पीठ करके मुस्कुराने लगे.

6 responses so far ↓
balkishan // November 26, 2007 at 5:14 pm |
हा! हा! हा! वाकई मज़ेदार है.
Gyan Dutt Pandey // November 26, 2007 at 7:32 pm |
सही है जी! टिप्पणी आपके ब्लॉग पर कर रहे हैं – बैंगन पर नहीं!
divyabh // November 26, 2007 at 8:24 pm |
बहुत अच्छे… बढ़िया पेश किया…
बहुत दिनों बाद अकबर-बीरवल को पढ़कर को और भी मजा आ गया…।
pryas // November 27, 2007 at 8:39 am |
बालकिशन जी, ज्ञानदत्त जी व दिव्यभ जी,
टिप्पणी करके प्रोत्साहित करने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद.
Kavitha.M // November 3, 2009 at 3:48 pm |
you have a lot of gramitical mistakes
Nisha // November 3, 2009 at 4:02 pm |
it is really nice I liked the Story VERY MUCH