jump to navigation

मेरी बेटी - एक छंद October 29, 2007

Posted by pryas in Uncategorized.
Tags: ,
6 comments

अक्सर हिन्दुसतान में लडकों को चंचल और शरारती माना जाता है और उनकी इन शरारतों पर उनके माता-पिता बडे रीझते और खुश होते हैं. और यदि एसी शरारतें लडकियाँ करें तो माता-पिता खुश होने के स्थान पर उन्हें शरारतें न करने के लिये कहते हैं.

इसी विषय पर एक छंद लिखने की कोशिश की है. अभी तक तो अन्य कवियों की कवितायें पोस्ट की हैं पर यह छंद मेरी अपनी रचना है. आपकी टिप्पणीयों की प्रतिक्षा रहेगी.

……छोटे-छोटे पैर और नन्हे-नन्हे हाथ लेके,
……ठुमक चली है जग, सब देखो दंग है,
……कभी दौडे तेज-तेज कभी दौडे धीरे से वो,
……तंग मुझे करने का, अजब ये ढंग है,
……यह देख चकित हो, कहा मेरी श्रीमती ने,
……लडकी है देखो करे, लडकों सी तंग है,
……मैने कहा रहने दो जी, ऐसे तुम मत कहो,
……गुडीया ये मेरी नहीं, लडकों से कम है.`