समस्या October 18, 2007
Posted by pryas in हितोपदेश.Tags: नरेश, bodhkatha, pryas, hindi blog, chittha, naresh, ब्लाग, हिन्दी, चिट्ठा, बोधकथाएँ
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एक गाँव में एक फकीर आए। वे किसी की भी समस्या दूर कर सकते हैं। सभी लोग जल्दी से जल्दी अपनी समस्या फकीर को बताकर उपाय जानना चाहते थे। नतीजा यह हुआ कि हर कोई बोलने लगा और किसी को कुछ समझ में नहीं आया। अचानक फकीर चिल्लाए. ‘खामोश’। सब चुप हो गए। फकीर ने कहा, “मैं सबकी समस्या दूर कर दूंगा। एक साथ बोलने के बजाय सब लोग एक-एक कागज पर अपनी समस्या लिख लाएं और मुझे दें।
कुछ ही देर में फकीर के सामने कागजों का ढेर लग गया। फकीर ने कागजों को एक टोकरी में रखा और सबसे गोला बनाकर बैठ ने को कहा। गोले के बीच में टोकरी रख दी।
एक आदमी की तरफ इशारा करके कहा, “यहाँ से शुरू करके सब बारी-बारी से आएंगे और एक-एक कागज़ उठा लेंगें।” ध्यान रहे किसी को अपना कागज़ नहीं उठाना है। लोग एक-एक कर आए कागज उठा-उठा कर अपनी-अपनी जगह बैठ गए। फकीर ने कहा,”अब इस कागज़ में लिखी किसी दूसरे की समस्या पढो। अगर चाहो तो मैं तुम्हारी समस्या दूर कर दूँगा पर उसके बदले कागज़ पर लिखी समस्या तुम्हारी हो जाएगी। तुम्हें लगता है कि तुम्हारी समस्या बडी है तो उसे दूर करवाकर कागज़ पर लिखी दूसरे की छोटी-सी समस्या अपना लो। चाहो तो आपस में कागज़ बदल लो। जब तय कर लो कि अपनी समस्या के बदले कौन सी समस्या लोगे तब मेरे पास आ जाना।
लोगों ने जब कागज़ पर लिखी समस्या पढी तो वे घबरा गए। लोग एक दूसरे से कागज़ बदल-बदल कर पढ रहे और बार-बार उन्हें लगता कि उनकी समस्या तो जैसी है वैसी है, पर इस नई समस्या का सामना वे कैसे कर पाएंगे। कुछ देर में हर किसी को समझ में आ गया कि उनकी समस्या जैसी भी है उनके अपने जीवन का हिस्सा है और वे उसी का सामना कर सकते हैं। एक-एक कर के लोग चुपचाप वहाँ से चले गये।










सही है. अगर इन्सान दूसरों की समस्याओं को देखे तो उसकी खुद की समस्या तो बहुत छोटी हो ही जाती है जिस पर वह नाहक परेशान होता रहता है. अच्छा संदेश.