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हाथी ने कुत्ते से क्या कहा? August 8, 2007

Posted by pryas in Uncategorized.
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जब भी कोई हाथी शहर में नजर आता है तो कुत्ते उस पर भौंकने लगते हैं। एक दिन हाथी ने कुत्ते को उसकी औकात दिखा दी। शायद फ़ैज़ाबादी साहब अपनी इस कविता में यही कहने की कोशिश की है।

हे मेरे गाँव के परमप्रिय कुत्ते
मुझे देख-देख कर चौंकते रहो
और जब तक दिखाई पडूं
भौंकते रहो, भौंकते रहो, मेरे दोस्त
भौंकते रहो

इसलिये कि मैं हाथी हूं
गाँव-भर का साथी हूं
बच्चे, बूढे, जवान, सभी छिडकते हैं जान
मगर तुम खडा कर रहे हो विरोध का झंडा
बेकार का वितंडा

अपना तो ऐसे-वैसों से कोई वास्ता नहीं है
‘परिश्रम के अलावा कोई रास्ता नहीं है’
इसलिये मैं हूं पूजनीय-वंदनीय
मेरा सम्मान है मर्यादा है
क्योंकि मेरी ‘दूरद्रष्टि है पक्का इरादा है’
और तुम ढुंढ रहे हो कौरा।
कौरे के लिये दौरा।
हाय रे मुफ्तखोरी पहरे के नाम पर चोरी
बिल्कुल वाहियात हो, रीते हो
आदमियों से भी गये-बीते हो

कई बार सजाएँ मिलीं तुम्हें कडी-कडी
मगर कुत्ते की पूंछ मुडी की मुडी
सुना है तुम्हारी जबान में अमृत बसता है
फिर ज़हर क्यों बो रहे हो?
मैं तो हँस रहा हूँ, तुम रो रहे हो।
भौंक-भौंक कर क्या कर पाओगे
कुत्ते की मौत मर जाओगे
अपने गाँव के प्रति वफादार बनो
अपनों से प्यार करो
तुम्हारी तरह कितने लोग
बेकार के चक्कर में चौंकते रहते हैं
हाथी चला जाता है
कुत्ते भौंकते रहते हैं।

Comments»

1. naresh - August 8, 2007

Are Waah!

2. Shastri JC Philip - August 8, 2007

“सुना है तुम्हारी जबान में अमृत बसता है
फिर ज़हर क्यों बो रहे हो?
मैं तो हँस रहा हूँ, तुम रो रहे हो।”

आपके लिखने का तरीका तो गजब का है — शास्त्री जे सी फिलिप

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info

3. paramjitbali - August 8, 2007

बहुत खूब!

4. ghughutibasuti - August 8, 2007

बहुत बढ़िया !
घुघूती बासूती

5. अनूप शुक्ल - August 8, 2007

यह भी खूब रही।