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“फिर क्या होगा उसके बाद?” July 9, 2007

Posted by pryas in Uncategorized.
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बालकृश्न राव जी कि कविता “फिर क्या होगा उसके बाद?” आज सुबह ना जाने कैसे ध्यान आ गयी। अन्तर जाल पर ढुंढा तो मनीष जी के ब्लाग पर मिल गयी, किंतु वह अंग्रीजी में थी। सोचा क्युं ना इसका हिन्दी रूपांतरण किया जाय। बस ऊंगलीयाँ शुरु हो गयीं।

फिर क्या होगा उसके बाद?
उत्सुक होकर शिशु ने पुछा,
माँ क्या होगा उसके बाद?

रवि से उज्जवल शशि से सुन्दर,
नव-किसलय दल से कोमलतर,
वधू तुम्हारे घर आयेगी,
उस विवाह उत्सव के बाद।

पलभर मुख पर स्मित की रेखा,
खेल गयी फिर माँ ने देखा,
उत्सुक हो कह उठा किन्तु वो,
फिर क्या होगा उसके बाद?

फिर नभ के ये नक्षत्र मनोहर,
स्वर्ग लोक से उतर उतर कर,
तेरे शिशु बनने को मेरे,
घर आयेंगे उसके बाद।

मेरे नये खिलौने लेकर,
चले ना जायें वो अपने घर,
चिंतित हो कह उठा किंतु वो,
फिर क्या होगा उसके बाद?

अब माँ का जी ऊब चुका था,
हर्श श्रान्ति मे डूब चुका था,
बोली फिर मैं बुढी होकर,
मर जाऊंगी उसके बाद।

ये सुनकर भर आये लोचन,
किन्तु पोंछकर उसे उसे क्षण,
उत्सुक होकर कह उठा फिर वो,
फिर क्या होगा उसके बाद?

कवि को बालक ने सिखलाया,
सुख दुख है पलभर कि माया,
है अनन्त का तत्व प्रश्न ये,
फिर क्या होगा उसके बाद?