- माँ की परिभाषा - April 16, 2007
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बेसन की सौंधी रोटी पर, खट्टी चटनी जैसी माँ।
याद आती है चौका बर्तन, चिमटा फुंकनी जैसी माँ।।
बाँस की खुर्री खाट के उपर, हर आहट पर कान धरे।
आधी सोई आधी जागी, थकी दोपहरी जैसी माँ।।
चिडीयों की चहकार में गूंजे, राधा मोहन अली-अली।
मुर्गे की आवाज़ से खुलती, घर की कुंडी जैसी माँ।।
बिवी, बेटी, बहन, पडोसन, थोडी-थोडी सी सब में।
दिन भर इक रस्सी के उपर, चलती नटनी जैसी माँ।।
बाँट के अपना चेहरा माथा, आँखें जाने कहाँ गयीं।
फटे पुराने इक एलबम में, चंचल लडकी जैसी माँ।।
-निदा फाज़ली-









