राहत ईन्दौरी के कुछ शेर - December 19, 2006
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राहत ईन्दौरी के कुछ शेर - 
उसकी कथ्थई आखों में हैं जन्तर मन्तर सब
चाकू वाकू, छुरीयां वुरीयां, खन्जर वन्जर सब।
जिस दिन से तुम रुठी मुझसे रुठे रुठे से हैं
चादर वादर, तकिया वकिया, बिस्तर विस्तर सब।
मुझसे बिछुड कर वो भी कहाँ अब पहले जैसी है
भीगे पड गये कपडे वपडे, ज़ेवर वेवर सब।










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