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वालिद की वफात पर - निदा फाज़ली - November 22, 2006

Posted by pryas in Uncategorized.
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तुम्हारी कब्र पर
मैं फातिहा पढने नहीं आयानिदा फाज़ली (Nida Fazli)

मुझे मालूम था
तुम मर नहीं सकते
तुम्हारी मौत की सच्ची खबर जिसन उडाई थी
वो झूठा था
वो तुम कब थे
कोइ सूखा हुआ पत्ता हवा से हिल के टूटा था
मेरी आँखें
तुम्हारे मंजरों में क़ैद हैं अब तक
मैं जो भी देखता हुँ
सोचत हुँ
वो….. वही है
जो तुम्हारी नेकनामी और बदनामी की दुनियाँ थी
कहीं कुछ भी नहीं बदला
तुम्हारे हाथ
मेरी उँगलियों में सांस लेते हैं
मैं लिखने के लिए
जब भी कलम कागज़ उठाता हुँ
तुम्हें बैठा हुआ मैं अपनी ही कुर्सी में पाता हुँ
बदन में मेरे जितना भी लहू है
वो तुम्हारी
लग्ज़िशों नाकामियों के साथ बहता है
मेरी आवाज़ में छुप कर
तुम्हारा जहन रहता है
मेरी बिमारियों में तुम
मेरी लाचारीयों में तुम
तुम्हरी कब्र पर जिसने तुम्हारा नाम लिक्खा है
वो झूठा है
तुम्हारी कब्र में मैं दफ्न हूँ
तुम मुझ में ज़िन्दा हो
कभी फुर्सत मिले तो फातिहा पढने चले आना
- निदा फाज़ली -